Saturday, January 22, 2011

लोकसभा चैनल के कार्यक्रम का सच...


यदि किसी चैनल के कार्यक्रम में आप बतौर ऑडिएंस भाग लेने जाएं और अपने आप को अभिव्यक्त भी न कर पाएं... कैसा महसूस करेंगें? बेशक यदि यह किसी सरकारी चैनल के माध्यम से हो तो और भी दुःखद है। आज की पड़ताल कुछ इसी विषय पर है।
    हुआ यूं, मंगलवार, 18 जनवरी को आई आई एम सी हिन्दी पत्रकारिता के छात्र लोकसभा चैनल के कार्यक्रम ‘अस्मिता’ में बतौर ऑडिएंस भाग लेने गए। विषय था ‘नर्सरी में बच्चों के एडमिशन में अभिभावकों को हो रही परेशानी’। जैसा कि आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में ऑडिएंस अतिथियों से प्रश्न पूछने के लिए स्वतंत्र होते हैं किंतु लोकसभा चैनल में ऑडिएंस द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न भी पहले से नियोजित थे। कार्यक्रम में भाग लेने से पहले प्रत्येक छात्र को एक पर्ची पर क्या प्रश्न पूछना है यह लिखकर दे दिया गया। उपस्थित छात्रों में इस बात का रोष था कि वे स्वयं को अभिव्यक्त नहीं कर पाए। छात्रों की प्रतिक्रिया यहां तक थी कि अब वे लोकसभा के चर्चा पर आधारित कार्यक्रम में भाग लेने नहीं जाएंगे।

    हालांकि कार्यक्रम में भाग लेने आए अतिथियों ने काफी हद तक विषय से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया और विषय की गंभीरता बनाए रखी। अतिथियों में सुमित वोहरा जो एन जी ओ चलाते हैं और बच्चों के एडमिशन में अभिभावकों की समस्या को उठाते हैं, सचिन जी सामाजिक मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं, राजशेखर व्यास दूरदर्शन के अधिकारी रह चुके है और अशोक अग्रवाल जाने माने वकील हैं। कार्यक्रम की संचालिका समीना सिद्दीकी ने भी कार्यक्रम को रूचिकर बनाए रखा। कार्यक्रम में बच्चों एवं अभिभावकों समस्या, राइट टू एजुकेशन यानी शिक्षा के अधिकार, सरकार का रूख, शिक्षा की ब्रैंडिंग जैसे मुद्दों पर बात हुई।
    लोकतंत्र की आस्था का केंद्र रही मीडिया स्वयं की अभिव्यक्ति का खुला मंच रही है, किंतु यह कहां तक उचित है जहां पत्रकारिता के छात्रों को ही अभिव्यक्ति से महरूम रहना पड़े। लोकसभा चैनल का उदाहरण काफी नहीं है? पड़ताल जारी है...
   

2 comments:

  1. बहुत बढ़िया लिखा है सुरभि।
    सही बात है।

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  2. acha hai. bilkul theek ilkha..............

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